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जीएसटी क्या है? फुल फॉर्म, प्रकार और कब लागू हुआ

GST kya hai, iska full form, kab lagu hua, kitne prakar ki hoti hai, aur GST number kaise milta hai — सब कुछ सरल हिंदी में।

GST का फुल फॉर्म Goods and Services Tax है, जिसे हिंदी में वस्तु एवं सेवा कर कहते हैं। यह भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू एक अप्रत्यक्ष कर (indirect tax) है, जो वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई पर लगता है। इसने एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स और वैट जैसे 17 अलग-अलग करों की जगह ली। 22 सितंबर 2025 से GST की चार मुख्य दरें हैं — 0%, 5%, 18% और 40% — और सोने-चाँदी पर 3%।

मुख्य बातें
  • फुल फॉर्म: Goods and Services Tax — वस्तु एवं सेवा कर
  • कब लागू हुआ: 1 जुलाई 2017, संविधान के 101वें संशोधन से
  • प्रकार: CGST + SGST (राज्य के भीतर), IGST (दो राज्यों के बीच)
  • 2026 की दरें: 0%, 5%, 18%, 40%; सोने-चाँदी पर 3%
  • GST नंबर: 15 अंकों का GSTIN, पहले दो अंक राज्य का कोड
  • पंजीकरण: कारोबार ₹40 लाख (माल) / ₹20 लाख (सेवाएँ) से ऊपर

GST का फुल फॉर्म क्या है?

GST का फुल फॉर्म Goods and Services Tax है। हिंदी में इसे वस्तु एवं सेवा कर कहा जाता है। “Goods” यानी वस्तुएँ — जैसे मोबाइल, कपड़े, सीमेंट — और “Services” यानी सेवाएँ — जैसे होटल में ठहरना, वकील की फीस, या ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन। GST दोनों पर एक ही कानून के तहत लगता है, इसलिए इसे “एक देश, एक कर” (One Nation, One Tax) भी कहा जाता है।

GST एक अप्रत्यक्ष कर है: दुकानदार या कंपनी इसे आपसे कीमत के साथ वसूलती है और सरकार को जमा करती है। आयकर (income tax) इसके उलट एक प्रत्यक्ष कर है, जो आप अपनी कमाई पर खुद भरते हैं।

GST कब लागू हुआ?

भारत में GST 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ। 30 जून 2017 की आधी रात को संसद के केंद्रीय कक्ष में एक विशेष सत्र में इसकी शुरुआत हुई। इसके लिए संविधान में 101वाँ संशोधन (Constitution 101st Amendment Act, 2016) किया गया, जिसने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को एक ही सप्लाई पर एक साथ कर लगाने का अधिकार दिया, और अनुच्छेद 279A के तहत GST काउंसिल बनाई, जो दरें तय करती है।

GST से पहले एक ही वस्तु पर कई कर लगते थे — फैक्ट्री से निकलते समय एक्साइज, राज्य में बिकने पर वैट, दूसरे राज्य में जाने पर CST, शहर में घुसने पर ऑक्ट्रॉय। और हर कर पिछले कर को जोड़कर लगता था, यानी टैक्स पर टैक्स। GST ने इस सबको एक कर में बदल दिया।

पहले लगने वाले करअब
केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, अतिरिक्त सीमा शुल्कCGST / IGST
वैट, CST, एंट्री टैक्स, ऑक्ट्रॉय, लग्ज़री टैक्स, मनोरंजन करSGST / IGST

पेट्रोल-डीज़ल, शराब और बिजली अब भी GST से बाहर हैं — इन पर राज्य अपना अलग कर लगाते हैं। सितंबर 2025 में GST में सबसे बड़ा बदलाव आया, जिसे GST 2.0 कहा जाता है: 12% और 28% के स्लैब हटा दिए गए।

GST कितने प्रकार की होती है?

GST मुख्य रूप से चार प्रकार की होती है। कौन-सी लगेगी, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि माल एक ही राज्य के भीतर बिका या दो राज्यों के बीच।

प्रकारपूरा नामकौन वसूलता हैकब लगता है
CGSTCentral GST (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर)केंद्र सरकारएक ही राज्य के भीतर सप्लाई पर, दर का आधा हिस्सा
SGSTState GST (राज्य वस्तु एवं सेवा कर)राज्य सरकारएक ही राज्य के भीतर सप्लाई पर, दर का बाकी आधा हिस्सा
UTGSTUnion Territory GSTकेंद्र शासित प्रदेशबिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में SGST की जगह
IGSTIntegrated GST (एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर)केंद्र सरकार, फिर राज्य से बाँटा जाता हैदो राज्यों के बीच सप्लाई पर, और आयात-निर्यात पर

उदाहरण: दिल्ली में 18% वाली कोई चीज़ बिकी तो बिल पर 9% CGST + 9% SGST लिखा होगा। वही चीज़ दिल्ली से मुंबई भेजी गई तो 18% IGST लगेगा। दोनों में कुल टैक्स बराबर है — सिर्फ बँटवारा बदलता है।

GST कैसे काम करता है?

GST की सबसे ख़ास बात है इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)। हर पंजीकृत व्यापारी खरीद पर GST देता है और बिक्री पर GST वसूलता है, लेकिन सरकार को सिर्फ दोनों का अंतर जमा करता है। 18% की दर पर ₹1,000 के माल को देखें:

चरणखरीदाबेचाGST वसूलाक्रेडिट लियासरकार को दिया
निर्माता₹0₹1,000₹180₹0₹180
थोक विक्रेता₹1,000₹1,500₹270₹180₹90
दुकानदार₹1,500₹2,000₹360₹270₹90
कुल₹360

ग्राहक ने ₹2,000 की खरीद पर ₹360 टैक्स दिया — ठीक 18% — और सरकार को कुल ₹360 ही मिले। किसी पर टैक्स के ऊपर टैक्स नहीं लगा।

2026 में GST की दरें (स्लैब)

दरक्या-क्या आता है
0%ताज़ी सब्ज़ियाँ-फल, छपी किताबें, UHT दूध, पैक किया पनीर, रोटी-पराठा, व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा, 36 जीवन-रक्षक दवाएँ
3%सोना, चाँदी और आभूषण (धातु के मूल्य पर); मेकिंग चार्ज पर 5%
5%दवाएँ, पैक किया खाना, ₹2,500 तक के कपड़े-जूते, ₹7,500 तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट का खाना, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ
18%ज़्यादातर सामान और सेवाएँ: इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, स्टील, छोटी कारें, फर्नीचर, प्रोफेशनल सेवाएँ
40%लग्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की बाइक, कोल्ड ड्रिंक, तंबाकू
12%सिर्फ ईंटें और मिट्टी की छत की टाइलें — बाकी सब पर 12% हट चुका है

किसी भी चीज़ की सही दर, HSN कोड और कैलकुलेटर के लिए GST रेट फाइंडर देखें।

GST नंबर (GSTIN) क्या होता है?

हर पंजीकृत व्यापारी को 15 अंकों का एक GSTIN मिलता है, जो हर बिल पर लिखना ज़रूरी है। यह नंबर बेतरतीब नहीं होता — इसका हर हिस्सा कुछ बताता है।

अंकमतलबउदाहरण: 07AAAAA0000A1Z4
1–2राज्य का कोड07 = दिल्ली
3–12व्यापारी का PANAAAAA0000A
13उस राज्य में इसी PAN का कौन-सा पंजीकरण है1 = पहला
14हमेशा Z
15चेक डिजिट4

पहले दो अंकों से पता चल जाता है कि व्यापारी किस राज्य में पंजीकृत है। सभी राज्यों के कोड की सूची और GSTIN जाँचने का टूल यहाँ है।

GST नंबर कैसे लें?

GST पंजीकरण तब ज़रूरी है जब साल भर का कुल कारोबार ₹40 लाख (माल) या ₹20 लाख (सेवाएँ) से ऊपर हो जाए (कुछ पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में यह सीमा कम है)। Amazon-Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचने के लिए पहली बिक्री से ही पंजीकरण ज़रूरी है, चाहे कारोबार कितना भी कम हो।

पंजीकरण gst.gov.in पर मुफ़्त और ऑनलाइन है। पहले PAN, मोबाइल और ईमेल से एक अस्थायी नंबर (TRN) मिलता है, फिर व्यापार की जानकारी और दस्तावेज़ — PAN कार्ड, आधार, व्यापार के पते का प्रमाण, बैंक खाते का विवरण, फोटो — अपलोड करने पर ARN मिलता है। जाँच के बाद, आमतौर पर कुछ कार्यदिवसों में, GSTIN जारी हो जाता है।

सोने पर GST कितना है?

सोने पर 3% GST लगता है — 24 कैरेट, 22 कैरेट, 18 कैरेट सब पर बराबर। गहनों पर मेकिंग चार्ज पर अलग से 5% लगता है। यानी ₹60,000 के सोने और ₹6,000 मेकिंग चार्ज वाले गहने पर GST ₹1,800 + ₹300 = ₹2,100 बनेगा। सिक्के और बिस्किट पर मेकिंग चार्ज नहीं होता, इसलिए उन पर सीधा 3%। पूरी जानकारी और कैलकुलेटर सोने पर GST पेज पर है।

यह गाइड अंग्रेज़ी में और विस्तार से What is GST? पर उपलब्ध है।

आम सवाल

GST यानी वस्तु एवं सेवा कर, भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू एक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर लगता है। इसने एक्साइज, सर्विस टैक्स और वैट जैसे 17 करों की जगह ली।

GST का फुल फॉर्म Goods and Services Tax है। हिंदी में इसे वस्तु एवं सेवा कर कहते हैं।

भारत में GST 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ। इसके लिए संविधान में 101वाँ संशोधन किया गया था।

चार प्रकार: CGST (केंद्रीय), SGST (राज्य), UTGST (केंद्र शासित प्रदेश) और IGST (एकीकृत)। एक ही राज्य में बिक्री पर CGST और SGST लगते हैं; दो राज्यों के बीच बिक्री और आयात पर IGST लगता है।

GSTIN, 15 अंकों का पंजीकरण नंबर जो हर पंजीकृत व्यापारी को मिलता है और हर बिल पर लिखना ज़रूरी है। पहले दो अंक राज्य का कोड, अगले दस PAN, फिर एक अंक, Z और चेक डिजिट।

gst.gov.in पर मुफ़्त ऑनलाइन आवेदन करें। PAN, आधार, व्यापार के पते का प्रमाण और बैंक विवरण चाहिए। कारोबार 40 लाख (माल) या 20 लाख (सेवाएँ) से ऊपर होने पर पंजीकरण ज़रूरी है; ई-कॉमर्स पर बेचने के लिए पहली बिक्री से ही।

सोने पर 3% GST लगता है, 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सब पर बराबर। गहनों के मेकिंग चार्ज पर अलग से 5% लगता है।

चार मुख्य दरें: 0%, 5%, 18% और 40%। सोने-चाँदी पर 3%। 12% सिर्फ ईंटों और मिट्टी की छत की टाइलों पर बचा है।

चार: CGST, SGST, UTGST और IGST। राज्य के भीतर बिक्री पर CGST + SGST (या UTGST), दो राज्यों के बीच और आयात पर IGST।

ज़्यादातर सामान और सेवाएँ: मोबाइल, लैपटॉप, टीवी, सीमेंट, स्टील, छोटी कारें, फर्नीचर, ₹2,500 से ऊपर के कपड़े-जूते, ₹7,500 से ऊपर के होटल कमरे, और प्रोफेशनल सेवाएँ जैसे CA, वकील और सॉफ्टवेयर।

साल भर का कुल कारोबार ₹40 लाख (माल) या ₹20 लाख (सेवाएँ) से ऊपर होने पर पंजीकरण ज़रूरी है; कुछ पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में सीमा ₹20 लाख / ₹10 लाख है। ई-कॉमर्स पर बेचने वालों के लिए पहली बिक्री से ही।

ग्राहक के तौर पर हर बार खरीद पर, कीमत में शामिल होकर। व्यापारी के तौर पर पंजीकरण के बाद हर महीने या तिमाही GSTR-3B के साथ, बिक्री पर वसूले GST में से खरीद का इनपुट टैक्स क्रेडिट घटाकर।